Ek nazam
15 aug 2026
आज फिर कलम उठाई
किताब सजाई
कुछ लिखने बैठी
और फिर तेरी याद आई।
अभी तो खयाल आया ही था
अभी तो कलम स्याही मैं डुबोया ही था,
फिर यह आंख कैसे भर आई,
अभी तो एक नज़्म का ही खयाल था,
अभी तो एक हर्फ ही जहन मैं बंधा था,
फिर सब भूल आई,
मैं शायद अपनी शायरी तेरी दहलीज पर छोड़ आई।
आज फिर कलम उठाई
किताब सजाई
कुछ लिखने बैठी
और फिर तेरी याद आई।
कोमल जामवाल
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